विदेशी ताकतों द्वारा भारतीय संस्कृति और धर्म को कमजोर करने के प्रयासों और देश भर में संतों पर हो रहे आक्षेपों को लेकर पं. श्री राहुल कृष्ण महाराज ने गहरी चिंता व्यक्त की है। जन जागरण मंच द्वारा जारी एक हालिया वीडियो में उन्होंने सनातन धर्म की वर्तमान स्थिति, आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण और हिंदू संतों के सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।चर्चा के दौरान यह मुद्दा उठाया गया कि जो भी संत सनातन धर्म के प्रचार और नाम जप में लगे हैं, उन्हें किसी न किसी रूप में निशाना बनाया जा रहा है। पं. राहुल कृष्ण महाराज ने 90 वर्षीय आसाराम बापू के 14 साल से जेल में होने, स्वामी जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी और स्वामी लक्ष्मण सरस्वती की हत्या जैसी घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के लिए संतों को हमेशा संघर्ष करना पड़ा है। उन्होंने करपात्री जी महाराज का भी उदाहरण दिया, जिन्होंने गौ माता की रक्षा के लिए बड़े आंदोलन किए और कई बार जेल गए।
संस्कारों की कमी और धर्मांतरण पर चिंता
महाराज जी ने समाज में बढ़ रही 'लव जिहाद' जैसी समस्याओं और युवाओं के ईसाई धर्म की ओर आकर्षित होने का मुख्य कारण संस्कारों की कमी को बताया। उन्होंने अभिभावकों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि हम अपने बच्चों को हनुमान चालीसा पढ़ना नहीं सिखाते और अपनी संस्कृति का पालन करने में शर्माते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान राम और कृष्ण के चरित्र को केवल पूजने के बजाय उसे जीवन में उतारने की आवश्यकता है।उन्होंने समाज से अपील की है कि प्रत्येक घर में बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार दिए जाएं, ताकि सनातन संस्कृति जीवंत रहे और देश महान बन सके।
पं. श्री राहुल कृष्ण महाराज जी ने वर्तमान समय में सनातन संस्कृति के सामने खड़ी चुनौतियों पर खुलकर बात की है। आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ते धर्मांतरण से लेकर बापू आशाराम जी, स्वामी जयेंद्र सरस्वती जी और स्वामी प्रेमानंद जी जैसे संतों के अभियानों में आ रही बाधाओं तक, महाराज जी ने कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे आज युवाओं को 'लव जिहाद' जैसी समस्याओं से बचाने के लिए बचपन से ही सही संस्कार, हनुमान चालीसा का पाठ और अपने धर्म पर गर्व करना सिखाना जरूरी है।